मंगलवार, 28 मई 2013

सम्बन्धक अंकुरण में


सम्बन्धक अंकुरण में,
जे स्वांगक मैट मिल्बैत छैथ,
कुटिलताक मुस्की,
आ आरोपक चुश्की,
स कठोर प्रहार करैत छैथ,
से सायद बिसैर गेल छैथ,
जे बबुर रोपला स,
कांट धसबे टा करैत छै,
आ बिना स्नेह स सिंचित सम्बन्ध,
 समयक उतरार्ध में,
तिरस्कृत कांटक हाथ-पात बनबैत छै,
जे छूलो मात्र स घावे-घाव करैत छै,
बिधि के बिधान स,
कस्ट सहैत,
निरीह-सहज-सरल राम स,
हर युग में रावन मरै छै,
जे सब स पैघ आ बलशाली,
धनवान आ चालाक छै,
अपने अहंकार स,
अपन सर्वनाश करैत छै, 

2 टिप्‍पणियां:

  1. पंकज बाबू - भाव ह्रदय सं निकलल अछि - गहींर तकि धंसि रहल अछि

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