गुरुवार, 7 फ़रवरी 2013

उद्वोधन


कहियो पूर्णिमा सन आलोकित,
मैथिल, मिथिला आ मैथिली,
आइ घोर अन्हरियामे हराओल अइ,
किछ दूर टिमटिमाइत तारा सन,
किछ मिटैल पगडण्डी,
आरि-धुरिमे ओझराएल अइ,
सभ्यातक सूर्य,
कहिया परिचयकेँ बदलि देलक,
किछ आभासो नै भेल,
मुदा !
जहन-जहन पाछू तकैत छी,
ह्रदयमे किछु उथल-पुथल,
बहराइ लेल व्याकुल अइ,
मुदा !
भीतरे-भीतर घुटि जाइत अइ,
स्वच्छन्दता- स्वतंत्रता नै अइ,
अपन अहंग,
सैहबी डोरीमे बन्हाएल,
जाबी लगौने,
बरद जकाँ ऑफिसक दाउनमे लागल छी,
अपन सहजता-सरलतासँ डेराइत,
जे पाछू नै भऽ जाइ ,
अपन परिचयसँ भगैत,
नव परिचय बनाबैमे लागल छी,
मुदा !
ओ स्वर्णिम गौरव गाथा,
कोना लिखब,
माता-पिता आ पूर्वजक प्रति श्रद्धा बिनु,
भाषाक प्रेम सिनेह बिनु,
कोन रंगसँ रंगब
अपन कैनवासकेँ…..
कोन गीतसँ सजैब
अपन जीवनकेँ ……
मुदा !
हम सुतल नै छी,
मरल नै छी,
जागल छी,
हमर अल्हड़ता, हमर सहजता, हमर नम्रता
हमर परिचय अइ,
सभ्यातक आलोकसँ आलोकित,
आइ आब हम समर्थवान छी,
तँ किएक ने अपन समृद्धिसँ,
अपन परिचयकेँ सींची,
अतीत तँ स्वर्णिम छल,
आब आइ आ आबैबला काल्हि,
केँ सेहो स्वर्णिम बनाबी,
सभ गोटे मिली कऽ,
एक दोसरकेँ मैथिलीक रसपान कराबी.


पंकजझा23@ जीमेल.कॉम

शुक्रवार, 30 नवंबर 2012

विवाह विचारक मेल नै व्यापारक खेल अई


जे देखलौं, जे सुनलौं,
जे महसुस केलौं,
सैह कहैत छी,
सैह लिखैत छी,
मुदा !
बड्ड बिडम्बना अई,
अहाँ अपन प्रतिबिम्ब स डेरैत छी,
स्वयं के परिचय स भगैत,
कैकटा मुखौटा लगौने छी,
हमरा बुझल अई,
अहाँ घुटई नै छी,
कियाकि अहाँक हृदय आ मष्तिस्क,
आब बैंट गेल अई, 
कैट गेल अई,
बिचक दुरी आब सुन्न भ गेल अई,
विचार नै, व्यापार आब,
जीवन के आधार भ गेल अई,
तैं हम फेर स कहैत छी,
विवाह विचारक मेल नै,
संबंधक आर में,
व्यापारक खेल अई,   
मानू ने मानू,
आजुक सत्य याह अई |  

सोमवार, 28 मई 2012

स्वयं के रीढ़ युक्त बनाबय में लागल छि......


भ्रस्टाचार स त्रस्त,
लोक छिलमिला रहल छैथ,
आंदोलनक बिगुल बजा रहल छैथ,
मुदा ओ बेखबर छैथ,
जे हुनको रक्त में भ्रस्ट आचरण दौर रहल छैन,
हुनक जन्म स पहिलही,
हुनकर पिता, समाज,
दहेजक दूषित बिचार स,
हुनकर निर्माण प्रारंभ केलैन,
विवाहे स- आधारे स,
निर्माण के प्रारम्भे स,
अपन दुर्बल्तक आर में,
हुनका जन्म देलखिन,
आ समयक क्रम में,
हुनकर अब्चेतन मन के,
हर  भाग में,
भ्रस्टताक उदहारण भैर देलखिन,
हुनक रक्त में ओ तेज कहाँ,
जहिना अनाज, फल, फसल ,
कित्रिम  खाद के प्रयोग स,
रश  हिन् भ गेल  अई,
तहिना आइ के युवा उर्जा बिहीन छैथ,
जिनका  सिर्फ गर्दभ गान अबै छैन,
अपन स्वाभिमान नै,
ओ पिता के आर में,
आ  पिता हुनकर आर में,
पुनः  वैह चक्र चलबैत छैथ,
आब  कहू यौ युवा,
कि  बिना ध्यान, ज्ञान, विज्ञान के,
अहाँ  अई स उबैर सके छि,
अहाँ लग समय कहाँ अई,
मूल्य  के मूल्य आंक्कै के,
अहाँ लग उर्जा कहाँ अई,
तटस्त रहै के,
हमरा त बुझाना जैत अई,
अहाँ वैह राक्षस छि,
जेकरा स्त्री और धन दुनु देल जैत छल,
आ समय के प्रवाह में,
कोनो वीर,
अहाँ के छाती पर बज्र प्रहार कै,
अहाँ के अंत करै छलाह,
मुदा  अई घोर कलयुग में,
ओ  वीर कतय छैथ,
से  नै जनैत छि,
मुदा !
स्वयं के रीढ़ युक्त बनाबय में लागल छि,

बुधवार, 25 मई 2011

सचक पथ


सच त याह अई
कि सचक पथ पर
शुले टा गड़त
मोन भीतरे भीतर सबटा सहत
कियाकि सच स
सहनायियेटाक ज्ञान भेटल अई
एकर बिपरीत
चालला स
शूल ने गड़त
कियाकि असहनशीलताक ज्ञान
पहिले स शूल के उखाड़वाक प्रयत्न करत